देश को दुनिया का पर्यटन हब बनाने की कोशिश
'अतुल्य भारत" केवल शब्द भर नहीं बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति, संस्कार व देश का वैशिष्टय एवं भव्यता की आभा अवलोकित होती है।
'अतुल्य भारत" के परिप्रेक्ष्य में भारत को विश्व का 'पर्यटन हब" बनाने
की कोशिशें आयाम लेते दिख रहीं हैं क्योंकि चाहे विश्वविख्यात धार्मिक एवं
सांस्कृतिक नगरी 'काशी" हो या शिपिंग मंत्रालय के लाइट हाउस हों... सभी को
नया आयाम-नया इन्द्रधनुषी रंग देने की कोशिशें हो रही हैं। भारत सरकार की
कोशिश है कि शिपिंग मंत्रालय के प्रकाश स्तम्भ (लाइट हाउस) की श्रंखला को
पर्यटन स्थल-केन्द्र के रुप-रंग में तब्दील करें।
पर्यटन दिवस पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के
विशिष्टजनों को भारत भ्रमण के लिए आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी ने फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को भारत आने का न्योता दिया था।
फेसबुक संस्थापक जुकरबर्ग शायद इसी परिप्रेक्ष्य में भारत आये भी आैर आगरा
के ताजमहल का दीदार किया। ताजमहल के सौन्दर्य से इतना अधिक प्रभावित हुये
कि उन्होंने यहां तक कहा कि शीघ्र ही पत्नी को साथ लेकर ताजमहल देखने
आयेंगे।
केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा का कथन है कि भारत को विश्व का
पर्यटन हब बनायेंगे। भारत के विशिष्ट स्थलों, धरोहरों व सौन्दर्य से लबरेज
वास्तुशिल्प की कलाकृतियों की वास्तविकता को बरकरार रखते हुये इन्द्रधनुषी
आयाम देने की कोशिश हो रही है। इसके लिए भारत व कंबोडिया ने पर्यटन विकास
पर 'हम साथ साथ" के सिद्धांत पर सहमति दी है। इससे भारत व कंबोडिया के
पर्यटन स्थलों के विकास एवं प्रबंधन से लेकर सांस्कृतिक मेलों-प्रदर्शनियों
के आदान-प्रदान के अवसर भी खुलेंगे।
पर्यटन क्षेत्र को सेवाओं-सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने की दिशा में भारत
सरकार रीति-नीति का भी निर्धारण कर रही है। पर्यटन को चाहे चिकित्सा एवं
स्वास्थ्य से जोड़ने की बात हो या फिर सुरक्षा एवं स्वच्छंदता की राह हो,
भारत सरकार का संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय सार्थक आयाम-परिणाम देने वाली
रीति-नीति पर मंथन कर रहा है।
इसी परिप्रेक्ष्य में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर्यटन बोर्ड को
अस्तित्व में लाया गया। शासकीय रीति-नीति में पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च
प्राथमिकता में है क्योंकि पर्यटन को बढ़ावा तभी मिलेगा, जब पर्यटक
सुरक्षित होंगे। खास तौर से महिला पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित
करना-कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुुनौती है। पर्यटक सुरक्षित होंगे तो
व्यवसाय से लेकर रोजगार के अवसर बनते-विकसित होते रहेंगे।
स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को ध्यान में रख कर भारत सरकार के पर्यटन
मंत्रालय ने अतुल्य भारत हेल्पलाइन चालू की है। 'अतुल्य भारत" हेल्पलाइन के
टोल फ्री नम्बर 1800111363 एवं 1363 पर्यटकों को सुविधा-सहूलियत के लिए
जारी किये गये हैं। अब सरकार के सामने इसकी उपयोगिता एवं सार्थकता की
चुनौती है। अब चाहे स्वास्थ्य की बात हो या सुरक्षा की बात हो हेल्पलाइन
समय पर पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवायें समय पर उपलब्ध हो
सकें, यह एक बड़ी चुनौती है।
फिलहाल मंत्रालय ने हेल्पलाइन पर हिन्दी व अंग्रेजी भाषा की सुविधा दी है
लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो शीघ्र ही मंत्रालय एक दर्जन अंतरराष्ट्रीय
भाषाओं से हेल्पलाइन को जोड़ेगा। यह अंतरराष्ट्रीय भाषायें दुनिया के
पर्यटकों की दिक्कत व परेशानी समझने व उनके निदान में सहायक व मददगार साबित
होंगी। पर्यटक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रख कर मंत्रालय ने पर्यटक
पुलिस का गठन किया है।
पर्यटन क्षेत्र में पर्यटक सुरक्षा व उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखना
केन्द्र व प्रांतीय सरकारों के लिए एक बड़ी व गम्भीर चुनौती से कम नहीं
क्योंकि कश्मीर से कन्याकुमारी हो या उडीसा से उत्तराखण्ड हो.... कहीं
लालित्य, सौन्दर्य व माधुुर्य से परिवेश लबरेज दिखता है तो प्राकृतिक
सौन्दर्य अपनी आभा से परिवेश को आलोकित करता है।
देश के इन सभी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा व स्वास्थ्य
सेवायें उपलब्ध करना-कराना नीति-नियंताओं के लिए आसान नहीं होगा। वन
अभ्यारणों के भ्रमण की बात हो या गोवा में समुद्र तटीय आनन्द लेने की बात
हो, पर्यटक सुरक्षा कदम-कदम पर उपलब्ध करना-कराना अत्यन्त मुश्किल कार्य
है। सरकार के सामने एक ओर पर्यटक सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवायें एक गम्भीर
चुनौती के रुप में है तो वहीं पर्यटन विकास की लम्बी योजनायें आकार लेती
दिख रही हैं।
शिपिंग मंत्रालय एवं प्रकाशस्तम्भ एवंं प्रकाशपोत महानिदेशालय
देश में पौन सैकड़ा से अधिक करीब 78 प्रकाशस्तम्भ (लाइट हाउस) को पर्यटन
केन्द्र या पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की योजना पर कार्य कर रहा
है। फिलहाल गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु,
पुंडुचेरी, आंध्र प्रदेश, ओडिसा, अण्डमान निकोबार एवं पश्चिम बंगाल शामिल
हैं। प्रकाशस्तम्भ को पर्यटन स्थल या केन्द्र के रुप मे विकसित करने से
आसपास के इलाकों का भी विकास होगा।
पर्यटकों को आकर्षित करने की इस योजना के तहत होटल-मॉल्स,
रिजॉर्टस, समुद्री संग्रहालय, विरासत संग्रहालय, साहसिक खेल सुविधायें,
यादगार वस्तुओं की बिक्री व प्रदर्शनी, लेजर शो, स्पा एवं कायाकल्प
केन्द्र, रंगभूमि-थियेटर व अन्य पर्यटन आकर्षण की कलाकृतियां सहित बहुत कुछ
विकसित होंगे। विशेषज्ञों की मानें तो गोवा के अगुवाड़ा, ओडिसा के
चन्द्रभागा, महाबलीपुरम, कन्याकुमारी, तमिलनाडु के मुत्तोम, केरल में
कडालुर प्वाइंट, महाराष्ट्र के कई इलाकों में परियोजनाओं पर तेजी से कार्य
चल भी रहा है।
गौरतलब है कि प्रकाशस्तम्भों का उपयोग सदियों से जहाज चलाने वालों
के आवागमन के संकेत दीपों के रुप में रहा। व्यापक बदलाव के क्रम में अब
इनकी उपयोगिता देखी जा रही है। प्रबंधन व नीति-नियंता दुनिया के
प्रकाशस्तम्भ व उसके आसपास सुन्दर व शांत वातावरण व समृद्ध समुद्री विरासत
की बदौलत पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब रहे। प्रकाशस्तम्भ क्षेत्र
में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुये देश के शिपिंग मंत्रालय ने
प्रकाशस्तम्भों को पर्यटन केन्द्र में तब्दील करने की नीति अपनायी है।
विशेषज्ञों की मानें तो देश की करीब 7517 किलोमीटर लम्बी विशाल
तयीय रेखा पर 189 प्रकाशस्तम्भ संचालित हैं। बंगाल की खाड़ी में स्थित
अण्डमान एवं निकोबार द्वीप तथा अरब सागर स्थित लक्षद्वीप इनमें शामिल हैं।
देश के समृद्ध समुद्री विरासत से युक्त प्रत्येक प्रकाशस्तम्भ की अपनी
विशिष्ट गाथा है। जहाज चलाने वालों के लिए इनकी विशिष्टता अलग ही है।
विशेषज्ञों की मानें तो इन प्रकाशस्तम्भ में पर्यटन की अपार
संभावनायें हैं। देश को इनका लाभ लेना चाहिए। तमिलनाडु में चेन्नई एवं
महाबलीपुरम, केरल में अलेप्पी एवं कन्नानूर प्रकाशस्तम्भ को पर्यटन केन्द्र
के रुप में विकसित किया जा चुका है। देश-दुनिया के लाखों पर्यटकों की
आवाजाही से चकाचौंध दिखती है।
केन्द्र व प्रांत सरकारों को चाहिए पर्यटकों की सेवाओं-सुविधाओं का
विशेष ख्याल रखें क्योंकि इससे क्षेत्र का विकास होगा तो वहीं रोजगार के
अपार अवसर भी विकसित होंगे। 'अतिथि देवो भव:" की भावना सभी में होनी चाहिए।
चाहे वह देश का सामान्य नागरिक हो या शासकीय व्यवस्थाओं से ताल्लुक रखने
वाला नौकरशाह हो। राष्ट्र बढ़ेगा तो आप भी आगे बढ़ेंगे।

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